दिल हजारों पल मेरा रोता रहा मरता रहा । तू मगर फिर भी सनम, मुझपर सितम करता रहा ।।
आह ! मेरे रूह की तुझतक कभी पहुँची नहीं । और मैं इस दर्द में आह बस भरता रहा ।।
कवी : श्रीकांत चवरे 9595374741
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