इथे बेगडी सिद्धांतांची भक्ती असते
कोणाच्या रे जवळ एवढी शक्ती असते ?
उगा आतल्या आत तुझी दर्पोक्ती असते ...
9595374741
मै क्या करू के तुझे यकीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो
ये जिंदगी उदास रोज थी वही
उन्हीं गमोंमे भी ये मौज थी वही
आज तुम नसीब मे नवीन हो...
तुम मेरे खयालसे हसीन हो...
बंद आखोंसे तुझको देख लूं
भीड़ मे भी मन ही मन मै सोच लू
तुम मेरे गज़लो की जमीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो ।
-- श्रीकांत चवरे
06_03_2016
जिंदगी थमसी गई थी,
आज वो बहने लगी ...!
आजतक खामोश थी जो
बात वो कहने लगी ...!
कलभी तो आराम ही था
यादो में जब तू नही था !
वो अकेलापन सनम रे,
बेवजा लगता सही था !
अब तेरे आनेसे राते
मिठीसी रहने लगी ...!!
जिंदगी थमसी गई थी,
आज वो बहने लगी ...!
-श्रीकांत चवरे
मै क्या करू के तुझे यकीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो
ये जिंदगी उदास रोज थी वही
उन्हीं गमोंमे भी ये मौज थी वही
आज तुम नसीब मे नवीन हो...
तुम मेरे खयालसे हसीन हो...
बंद आखोंसे तुझको देख लूं
भीड़ मे भी मन ही मन मै सोच लू
तुम मेरे गज़लो की जमीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो ।
- श्रीकांत चवरे
कैसे कहूँ अनजान है तू
जो सपनो मे दिखती है ।
मेरी यादों मे बसती है ।
जब तनहासा होता हूँ
तब सासोंमे हसती है ।।
ऐसे हसीन लमहो से,
मेरी लगती पहचान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।। १।।
ऐसा था जब हाल नही
गिनता था जब साल नही
तुझसे बाते करने को
मै होता था बेहाल नही
तबसे मेरी धड़कन का
मुझको लगती अरमान है तू
कैसे कहू अनजान है तू ।।२।।
सोचता हूँ मुझसा दिल हो
मेरे लिये तू काबिल हो
सुख दुख के सब लमहो मे
संग मेरे तू शामिल हो
हाथ तेरा जो थाम लिया तो
अब लगती आसान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।३।।
अब आये हो तो आजाओ
मै खोया हूँ तुम खो जाओ
मै तो हूँ तैयार सदा ,
बस तुम भी मेरे हो जाओ
मान लिया अब सोच लिया
जान है तू वरदान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।४।।
- श्रीकांत विजय चवरे
arvindanuj.blogspot.com
कैसे कहूँ अनजान है तू
जो सपनो मे दिखती है ।
मेरी यादों मे बसती है ।
जब तनहासा होता हूँ
तब सासोंमे हसती है ।।
ऐसे हसीन लमहो से,
मेरी लगती पहचान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।। १।।
ऐसा था जब हाल नही
गिनता था जब साल नही
तुझसे बाते करने को
मै होता था बेहाल नही
तबसे मेरी धड़कन का
मुझको लगती अरमान है तू
कैसे कहू अनजान है तू ।।२।।
सोचता हूँ मुझसा दिल हो
मेरे लिये तू काबिल हो
सुख दुख के सब लमहो मे
संग मेरे तू शामिल हो
हाथ तेरा जो थाम लिया तो
अब लगती आसान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।३।।
अब आये हो तो आजाओ
मै खोया हूँ तुम खो जाओ
मै तो हूँ तैयार सदा ,
बस तुम भी मेरे हो जाओ
मान लिया अब सोच लिया
जान है तू वरदान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।४।।
- श्रीकांत विजय चवरे
arvindanuj.blogspot.com