Tuesday, December 27, 2016

दर्पोक्ती

जगण्यासाठी लाजिरवाणी सक्ती असते...!
इथे बेगडी सिद्धांतांची भक्ती असते
तोडुन द्याव्या भौतिकतेच्या सा-या बेड्या,
कोणाच्या रे जवळ एवढी शक्ती असते ?
ओढुन घेतो पांघरुणासम सहनशीलता,
उगा आतल्या आत तुझी दर्पोक्ती असते ...
- श्रीकांत चवरे
9595374741
(28-12-2016)

Saturday, April 9, 2016

मै क्या करू के तुझे यकीन हो...

मै क्या करू के तुझे यकीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो

ये जिंदगी उदास रोज थी वही
उन्हीं गमोंमे भी ये मौज थी वही
आज तुम नसीब मे नवीन हो...
तुम मेरे खयालसे हसीन हो...

बंद आखोंसे तुझको देख लूं
भीड़ मे भी मन ही मन मै सोच लू
तुम मेरे गज़लो की जमीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो ।

             -- श्रीकांत चवरे
06_03_2016

कुछ खास नहीं था जीवन मे...

Saturday, March 12, 2016

जिंदगी थमसी गई थी ...

जिंदगी थमसी गई थी,
आज वो बहने लगी ...!
आजतक खामोश थी जो
बात वो कहने लगी ...!

कलभी तो आराम ही था
यादो में जब तू नही था !
वो अकेलापन सनम रे,
बेवजा लगता सही था !

अब तेरे आनेसे राते
मिठीसी रहने लगी ...!!
जिंदगी थमसी गई थी,
आज वो बहने लगी ...!

                -श्रीकांत चवरे

तुम मेरे खयालसे हसीन हो

मै क्या करू के तुझे यकीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो

ये जिंदगी उदास रोज थी वही
उन्हीं गमोंमे भी ये मौज थी वही
आज तुम नसीब मे नवीन हो...
तुम मेरे खयालसे हसीन हो...

बंद आखोंसे तुझको देख लूं
भीड़ मे भी मन ही मन मै सोच लू
तुम मेरे गज़लो की जमीन हो
तुम मेरे खयालसे हसीन हो ।

       - श्रीकांत चवरे

Thursday, March 3, 2016

प्रीत ही खोटा इशारा देत गेली

नेहमी डोळ्यात धारा देत गेली
प्रीत ही खोटा इशारा देत गेली
थांबलो नाही कुणाच्या आस-याला,
ही गझल वेडी सहारा देत गेली
काळजाच्या आत आले सूख नाही
वेदना दारी पहारा देत गेली
टाळले दिवसा किती मी आठवांना !
रात्र देहाला शहारा देत गेली
कोण म्हणतो मार्ग हा होता सुखाचा?
जिंदगी पायी निखारा देत गेली
- श्रीकांत चवरे
18-02-2016

Wednesday, February 3, 2016

बोचरे हृदयात राणी शल्य होते

बोचरे हृदयात राणी शल्य होते
शेवटी हातात हे वैफल्य होते
हासलो होतो जरी प्रत्येकवेळी
वेदनेचे जीवनी प्राबल्य होते
ठेवले आशेवरी मज नेहमी तू,
हे तुला जमले बरे कौशल्य होते
जाउदे देशास या सोडून त्यांना
प्रेमही त्यांचे कुठे जाज्वल्य होते?
मी बरे झाले गड्या नास्तीक झालो
कोणत्या कामास हे मांगल्य होते ?
             - श्रीकांत विजय चवरे
03-02-2016

Wednesday, January 6, 2016

कैसे कहूँ अनजान है तू

कैसे कहूँ अनजान है तू

जो सपनो मे दिखती है ।
मेरी यादों मे बसती है ।
जब तनहासा होता हूँ
तब सासोंमे हसती है ।।

ऐसे हसीन लमहो से,
मेरी लगती पहचान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।। १।।

ऐसा था जब हाल नही
गिनता था जब साल नही
तुझसे बाते करने को
मै होता था बेहाल नही

तबसे मेरी धड़कन का
मुझको लगती अरमान है तू
कैसे कहू अनजान है तू ।।२।।

सोचता हूँ मुझसा दिल हो
मेरे लिये तू काबिल हो
सुख दुख के सब लमहो मे
संग मेरे तू शामिल हो

हाथ तेरा जो थाम लिया तो
अब लगती आसान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।३।।

अब आये हो तो आजाओ
मै खोया हूँ तुम खो जाओ
मै तो हूँ तैयार सदा ,
बस तुम भी मेरे हो जाओ

मान लिया अब सोच लिया
जान है तू वरदान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू  ।।४।।

- श्रीकांत विजय चवरे
arvindanuj.blogspot.com

कैसे कहूँ अनजान है तू

कैसे कहूँ अनजान है तू

जो सपनो मे दिखती है ।
मेरी यादों मे बसती है ।
जब तनहासा होता हूँ
तब सासोंमे हसती है ।।

ऐसे हसीन लमहो से,
मेरी लगती पहचान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।। १।।

ऐसा था जब हाल नही
गिनता था जब साल नही
तुझसे बाते करने को
मै होता था बेहाल नही

तबसे मेरी धड़कन का
मुझको लगती अरमान है तू
कैसे कहू अनजान है तू ।।२।।

सोचता हूँ मुझसा दिल हो
मेरे लिये तू काबिल हो
सुख दुख के सब लमहो मे
संग मेरे तू शामिल हो

हाथ तेरा जो थाम लिया तो
अब लगती आसान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू ।।३।।

अब आये हो तो आजाओ
मै खोया हूँ तुम खो जाओ
मै तो हूँ तैयार सदा ,
बस तुम भी मेरे हो जाओ

मान लिया अब सोच लिया
जान है तू वरदान है तू
कैसे कहूं अनजान है तू  ।।४।।

- श्रीकांत विजय चवरे
arvindanuj.blogspot.com